बीजेपी-कांग्रेस के ख़िलाफ़ केसीआर का अभियान मोर्चेबंदी है या खेमेबंदी? : नज़रिया
विधानसभा चुनावों में अपनी पार्टी की शानदार जीत से उत्साहित तेलंगाना के मुख्यमंत्री और टीआरएस सुप्रीमो के चंद्रशेखर राव (केसीआर) अब तीसरे मोर्चे या फ़ेडरल फ्रंट के गठन की कोशिश में जुट गए हैं. उनका कहना है कि बीजेपी की अगुआई वाले एनडीए और कांग्रेस के नेतृत्व वाले धड़े से अलग एक तीसरा मोर्चा होना चाहिए, जिसे आमतौर पर वो फेडरल फ्रंट कहते हैं. अभी तक इस कथित मोर्चे का न तो नाम तय है और न काम! अपने संभावित मोर्चे के कार्यक्रम, लक्ष्य और विचार को लेकर केसीआर ने अब तक कोई ठोस संकेत नहीं दिए हैं. लेकिन ओडिशा के मुख्यमंत्री और बीजेडी अध्यक्ष नवीन पटनायक और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी से उनकी हाल की मुलाकातों को नई मोर्चेबंदी के प्रयासों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. यह भी पढ़ें | सपा-बसपा 'गठबंधन' को कांग्रेस की कितनी ज़रूरत? उनके प्रयास का सबसे कमजोर पक्ष है कि हिन्दी-भाषी प्रदेशों में अभी तक इस नई मोर्चेबंदी की कोशिश में किसी बड़े नेता या दल का नाम नहीं जुड़ा. लोकसभा चुनाव के अब महज़ चंद महीने रह गए हैं पर भाजपा-एनडीए विर...