126 दागी प्रत्याशी मैदान में, 193 करोड़ रु. की संपत्ति के साथ शत्रुघ्न की पत्नी सबसे अमीर

नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण में 7 राज्यों की 51 सीटों पर 6 मई को मतदान होना है। इस चरण में 126 यानी 19% दागी उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। इन पर कोई न कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज है। 95 यानी 14% प्रत्यााशी ऐसे हैं जो गंभीर अपराध के आरोपी हैं। इस चरण में 184 करोड़पति उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में हैं। इनमें भाजपा से कांग्रेस में शामिल हुए शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी और लखनऊ से सपा उम्मीदवार पूनम सिन्हा सबसे अमीर हैं।

पूनम के पास 193 करोड़ रुपए की संपत्ति है। यह बात एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट में सामने आई है। एडीआर ने पांचवें चरण में चुनाव लड़ रहे 674 में से 668 प्रत्याशियों के हलफनामों का विश्लेषण किया है। पांचवें चरण में 6 मई को मतदान होना है।

नौ प्रत्याशियों के खिलाफ महिलाओं से जुड़े अपराध के मामले दर्ज हैं। इनमें दुष्कर्म, यौन उत्पीड़न और महिलाओं के प्रति क्रूरता जैसे मामले शामिल हैं। छह उम्मीदवार ऐसे हैं, जिन्होंने हलफनामे में यह घोषित किया है कि वे आपराधिक मामलों में दोषी पाए जा चुके हैं। तीन उम्मीदवारों के खिलाफ हत्या की धारा में मुकदमा चल रहा है। 21 प्रत्याशियों पर हत्या के प्रयास का आरोप है। पांच उम्मीदवार फिरौती के लिए अपहरण कराने के आरोपी हैं। पांच प्रत्याशियों के खिलाफ नफरतभरे बयान देने का मामला लंबित है।

एडीआर ने जिन 668 उम्मीदवारों के हलफनामों का विश्लेषण किया है, उनमें 184 यानी 28% प्रत्याशियों की संपत्ति एक करोड़ से ज्यादा है। भाजपा के 48 उम्मीदवारों में 38 यानी 79% और कांग्रेस के 45 में से 32 यानी 71% उम्मीदवार करोड़पति हैं। बसपा के 33 में से 17 और सपा के नौ में से आठ उम्मीदवारों ने अपनी संपत्ति एक करोड़ से अधिक बताई है। 31 निर्दलीय उम्मीदवार भी करोड़पति हैं। इस चरण में उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 2.57 करोड़ है।

इस चरण में 40% यानी 264 उम्मीदवार पांचवीं से बारहवीं तक पास हैं। जबकि, 52% यानी 384 उम्मीदवारोंं ने स्नातक या उससे ज्यादा पढ़ाई की है। 43 उम्मीदवारों ने बताया कि वे केवल शिक्षित हैं, जबकि छह ने खुद को निरक्षर बताया है। पांचवें चरण में 79 यानी सिर्फ 12% महिला उम्मीदवार हैं।

राहुल ने सोमवार को भी खेद जाहिर किया, माफी नहीं मांगी
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने चौकीदार चोर है वाले अपने बयान को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को नया हलफनामा दायर किया था। उन्होंने इसमें भी खेद ही जताया, माफी नहीं मांगी। राहुल ने हलफनामे में कहा था कि राजनीतिक लड़ाई में उनका कोर्ट को घसीटने का कोई इरादा नहीं है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा था, ‘‘जाहिर तौर पर कोई भी अदालत ऐसा नहीं कहेगी। इसलिए अदालती आदेश का दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से संदर्भ देना (जिस पर मैं अफसोस जताता हूं) और उसके साथ राजनीतिक नारा लगाना प्रचार के गर्म महौल में हुआ। हम यह समझाना नहीं चाहते थे कि अदालत ने इस मुद्दे पर कोई निष्कर्ष दिया है।’’

क्या है मामला?
दरअसल, हाल ही में शीर्ष अदालत राफेल डील के लीक दस्तावेजों को सबूत मानकर मामले की दोबारा सुनवाई के लिए राजी हो गई थी। इस पर राहुल ने कहा था कि कोर्ट ने मान लिया कि ‘चौकीदार ही चोर है।’ इसके बाद लेखी ने कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ अवमानना का केस दायर कर दिया था। इस पर कोर्ट ने राहुल को बिना नोटिस जारी किए ही जवाब मांगा था। राहुल ने 22 अप्रैल को माना था कि कोर्ट ने ऐसा कुछ नहीं कहा और गर्म चुनावी माहौल में जोश में उनके मुंह से यह बात निकल गई। उन्होंने अपनी टिप्पणी पर खेद जताया था।

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